श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 75: लङ्कापुरी का दहन तथा राक्षसों और वानरों का भयंकर युद्ध  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  6.75.66 
देहीत्यन्यो ददात्यन्यो ददामीत्यपर: पुन:।
किं क्लेशयसि तिष्ठेति तत्रान्योन्यं बभाषिरे॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
एक आकर कहता, ‘मुझे युद्ध दो’, तो दूसरा उसे लड़ने का अवसर देता; फिर तीसरा कहता, ‘तुम कष्ट क्यों उठाते हो? मैं उससे लड़ूंगा।’ इस प्रकार वे आपस में बातें करते रहते थे।
 
One would come and say 'Give me the battle', then the other would give him the opportunity to fight; then the third would say 'Why do you suffer? I will fight with him.' In this way they used to talk to each other.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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