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ramayan 6.75.5: जब उल्कापिंड लिए हुए वानरों ने सब ओर से आक्रमण किया, तब द्वार की रक्षा के लिए तैनात राक्षस सहसा भाग गए ॥5॥   |   ramayan सर्ग 6.75: लङ्कापुरी का दहन तथा राक्षसों और वानरों का भयंकर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 75: लङ्कापुरी का दहन तथा राक्षसों और वानरों का भयंकर युद्ध  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.75.5 
उल्काहस्तैर्हरिगणै: सर्वत: समभिद्रुता:।
आरक्षस्था विरूपाक्षा: सहसा विप्रदुद्रुवु:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जब उल्कापिंड लिए हुए वानरों ने सब ओर से आक्रमण किया, तब द्वार की रक्षा के लिए तैनात राक्षस सहसा भाग गए ॥5॥
 
When the monkeys carrying meteors attacked from all sides, the demons deployed to guard the door suddenly ran away. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)