श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 75: लङ्कापुरी का दहन तथा राक्षसों और वानरों का भयंकर युद्ध  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  6.75.38 
वानरोद‍्घुष्टघोषश्च राक्षसानां च नि:स्वन:।
ज्याशब्दश्चापि रामस्य त्रयं व्याप दिशो दश॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
वानरों की गर्जना, राक्षसों का कोलाहल और भगवान् राम के धनुष की टंकार- ये तीनों प्रकार की ध्वनियाँ सम्पूर्ण दिशाओं में फैल रही थीं ॥38॥
 
The roars of the monkeys, the uproar of the demons and the twirling of Lord Rama's bow - all these three kinds of sounds were spreading in all directions. ॥ 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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