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ramayan 6.75.34: इधर, बाण निकल जाने पर स्वस्थ हुए दोनों भाइयों महात्मा श्री राम और लक्ष्मण ने बिना किसी घबराहट के अपने-अपने उत्तम धनुष उठा लिए॥34॥   |   ramayan सर्ग 6.75: लङ्कापुरी का दहन तथा राक्षसों और वानरों का भयंकर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 75: लङ्कापुरी का दहन तथा राक्षसों और वानरों का भयंकर युद्ध  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.75.34 
विशल्यौ च महात्मानौ तावुभौ रामलक्ष्मणौ।
असम्भ्रान्तौ जगृहतुस्ते उभे धनुषी वरे॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
इधर, बाण निकल जाने पर स्वस्थ हुए दोनों भाइयों महात्मा श्री राम और लक्ष्मण ने बिना किसी घबराहट के अपने-अपने उत्तम धनुष उठा लिए॥34॥
 
Here, both the brothers, Mahatma Shri Ram and Lakshmana, who were healed after the arrow came out, picked up their best bows without any panic. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)