श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 75: लङ्कापुरी का दहन तथा राक्षसों और वानरों का भयंकर युद्ध  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.75.33 
उद‍्घुष्टं वानराणां च राक्षसानां च नि:स्वनम्।
दिशो दश समुद्रं च पृथिवीं च व्यनादयत्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
वानरों की गर्जना और राक्षसों की चीखें सब दिशाओं, समुद्रों और पृथ्वी से गूंजने लगीं ॥33॥
 
The roars of the monkeys and the cries of the demons resounded from all directions, the oceans and the earth. ॥33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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