श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 75: लङ्कापुरी का दहन तथा राक्षसों और वानरों का भयंकर युद्ध  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.75.28 
अश्वं मुक्तं गजो दृष्ट्वा क्वचिद् भीतोऽपसर्पति।
भीतो भीतं गजं दृष्ट्वा क्वचिदश्वो निवर्तते॥ २८॥
 
 
अनुवाद
कभी कोई हाथी किसी भटके हुए घोड़े को देखकर डरकर भाग जाता है, कभी कोई घोड़ा किसी भयभीत हाथी को देखकर भाग जाता है।
 
Sometimes an elephant would run away in fear on seeing a loose horse; sometimes a horse would run away on seeing a frightened elephant.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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