श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 75: लङ्कापुरी का दहन तथा राक्षसों और वानरों का भयंकर युद्ध  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  6.75.25-26h 
तानि निर्दह्यमानानि दूरत: प्रचकाशिरे॥ २५॥
हिमवच्छिखराणीव दह्यमानानि सर्वश:।
 
 
अनुवाद
दूर से वे जलती हुई गगनचुंबी इमारतें ऐसी लग रही थीं मानो हिमालय की चोटियाँ चारों ओर से जल रही हों। 25 1/2
 
Those burning skyscrapers looked from a distance as if the peaks of the Himalayas were burning from all sides. 25 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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