| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 75: लङ्कापुरी का दहन तथा राक्षसों और वानरों का भयंकर युद्ध » श्लोक 10 |
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| | | | श्लोक 6.75.10  | नानाविकृतसंस्थानं वाजिभाण्डपरिच्छदम्।
गजग्रैवेयकक्ष्याश्च रथभाण्डांश्च संस्कृतान्॥ १०॥ | | | | | | अनुवाद | | घोड़ों के आभूषण, उनकी काठी आदि जो नाना प्रकार के और विचित्र आकार के थे, जल रहे थे। हाथी के गले के आभूषण, उसे बाँधने की रस्सियाँ और रथों के सुन्दर सामान, सब अग्नि में जलकर राख हो रहे थे। | | | | The ornaments of the horses, their saddles etc. which were of many kinds and of strange shapes were being burnt. The ornaments around the neck of the elephant, the ropes to tie it and the beautiful accessories of the chariots, all were being burnt to ashes in the fire. | | ✨ ai-generated | | |
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