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ramayan 6.74.7: उस समय रात्रि हो चुकी थी, इसलिए हनुमान और महाबली विभीषण दोनों ही हाथों में मशालें लेकर युद्धभूमि में साथ-साथ घूमने लगे।   |   ramayan सर्ग 6.74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.74.7 
तावुभौ युगपद् वीरौ हनूमद्राक्षसोत्तमौ।
उल्काहस्तौ तदा रात्रौ रणशीर्षे विचेरतु:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उस समय रात्रि हो चुकी थी, इसलिए हनुमान और महाबली विभीषण दोनों ही हाथों में मशालें लेकर युद्धभूमि में साथ-साथ घूमने लगे।
 
By that time it was night, so both Hanuman and the great demon Vibhishana, with torches in their hands, began roaming together on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)