वह्नॺालयं वैश्रवणालयं च
सूर्यप्रभं सूर्यनिबन्धनं च।
ब्रह्मालयं शङ्करकार्मुकं च
ददर्श नाभिं च वसुन्धराया:॥ ६०॥
अनुवाद
इसके अतिरिक्त उन्होंने अग्नि, कुबेर और बारह सूर्यों से युक्त सूर्य के समान प्रकाशमान स्थान को भी देखा। उन्होंने चतुर्मुख ब्रह्मा, शंकरजी का धनुष और वसुन्धरा की नाभि को भी देखा॥ 60॥
Besides this, he also saw the place as bright as the sun, comprising of Agni, Kubera and the twelve suns. He also saw the four-faced Brahma, Shankarji's bow and the navel of Vasundhara.॥ 60॥