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ramayan 6.74.54: वीर हनुमान अपने पिता के समान ही पराक्रमी और तेज थे। वे सूर्य के मार्ग पर चलते हुए बिना थके तेजी से आगे बढ़ रहे थे। 54.   |   ramayan सर्ग 6.74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  6.74.54 
आदित्यपथमाश्रित्य जगाम स गतश्रम:।
हनूमांस्त्वरितो वीर: पितुस्तुल्यपराक्रम:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
वीर हनुमान अपने पिता के समान ही पराक्रमी और तेज थे। वे सूर्य के मार्ग पर चलते हुए बिना थके तेजी से आगे बढ़ रहे थे। 54.
 
Brave Hanuman was as valiant and swift as his father. He followed the path of the Sun and was advancing rapidly without getting tired. 54.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)