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ramayan 6.74.51: अपनी सर्पों के शरीर के समान भुजाएँ फैलाकर, पवनपुत्र तथा गरुड़ के समान शक्तिशाली हनुमान समस्त दिशाओं को खींचते हुए महान पर्वत गिरिराज हिमालय की ओर बढ़े।   |   ramayan सर्ग 6.74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  6.74.51 
स तौ प्रसार्योरगभोगकल्पौ
भुजौ भुजंगारिनिकाशवीर्य:।
जगाम शैलं नगराजमग्रॺं
दिश: प्रकर्षन्निव वायुसूनु:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
अपनी सर्पों के शरीर के समान भुजाएँ फैलाकर, पवनपुत्र तथा गरुड़ के समान शक्तिशाली हनुमान समस्त दिशाओं को खींचते हुए महान पर्वत गिरिराज हिमालय की ओर बढ़े।
 
Spreading his arms which looked like the bodies of serpents, Hanuman, the son of wind and as powerful as Garuda, proceeded towards the great mountain Giriraja Himalaya, pulling all directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)