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ramayan 6.74.5: विभीषण की बातें सुनकर बुद्धिमान पवनकुमार हनुमान ने ब्रह्मास्त्र का आदर करते हुए उनसे इस प्रकार कहा-॥ 5॥   |   ramayan सर्ग 6.74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.74.5 
ब्राह्ममस्त्रं ततो धीमान् मानयित्वा तु मारुति:।
विभीषणवच: श्रुत्वा हनूमानिदमब्रवीत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
विभीषण की बातें सुनकर बुद्धिमान पवनकुमार हनुमान ने ब्रह्मास्त्र का आदर करते हुए उनसे इस प्रकार कहा-॥ 5॥
 
Hearing the words of Vibhishana, the wise Pawankumar Hanuman, respecting Brahmastra, said to him thus -॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)