श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  6.74.44 
विद्याधरैर्मुनिगणैरप्सरोभिर्निषेवितम्।
नानामृगगणाकीर्णं बहुकन्दरशोभितम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ विद्याधर, ऋषि और अप्सराएँ भी रहती थीं। वहाँ चारों ओर अनेक प्रकार के हिरणों के झुंड फैले हुए थे और अनेक गुफाएँ उस पर्वत की शोभा बढ़ा रही थीं।
 
Vidyadhars, sages and Apsaras also lived there. Herds of deer of many kinds were spread all around there and many caves added to the beauty of that mountain.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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