श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.74.41 
पृथिवीधरसंकाशो निपीडॺ पृथिवीधरम्।
पृथिवीं क्षोभयामास सार्णवां मारुतात्मज:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
पर्वताकार पवनकुमार हनुमान ने उस पर्वत को दबाकर पृथ्वी और समुद्र में हलचल मचा दी।
 
Mountain-sized Pawankumar Hanuman caused a stir in the earth and the sea by pressing that mountain.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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