श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.74.4 
तस्मै तु दत्तं परमास्त्रमेतत्
स्वयंभुवा ब्राह्मममोघवीर्यम्।
तन्मानयन्तौ युधि राजपुत्रौ
निपातितौ कोऽत्र विषादकाल:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
‘स्वयंभू ब्रह्मा ने यह उत्तम अस्त्र इन्द्रजित को दिया था। यह ब्रह्मास्त्र के नाम से प्रसिद्ध है और इसकी शक्ति अमोघ है। युद्ध में इसकी लाज रखते हुए ये दोनों राजकुमार मारे गए हैं; अतः इसमें शोक करने की क्या बात है?’॥4॥
 
‘Swayambhu Brahma had given this excellent weapon to Indrajit. It is famous by the name of Brahmastra and its power is infallible. In the war, these two princes have fallen while protecting its honour; so what is there to be sad about in this?’॥ 4॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd