श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.74.37 
हरिपादविनिर्भग्नो निषसाद स पर्वत:।
न शशाक तदात्मानं वोढुं भृशनिपीडित:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हनुमान के पैरों के भार से पर्वत धरती में धंस गया। अत्यधिक दबाव के कारण वह अपना शरीर भी नहीं संभाल सका। 37.
 
The mountain sank into the earth under the weight of Hanuman's feet. Due to the excessive pressure, it could not even hold its own body. 37.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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