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ramayan 6.74.36: वीर हनुमान एक पर्वत की चोटी पर खड़े हो गए और अपने पैरों से उस विशाल पर्वत को दबा दिया, जिससे वह दूसरे पर्वत के समान दिखाई देने लगा। 36.   |   ramayan सर्ग 6.74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  6.74.36 
स पर्वततटाग्रस्थ: पीडयन् पर्वतोत्तमम्।
हनूमान् दृश्यते वीरो द्वितीय इव पर्वत:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
वीर हनुमान एक पर्वत की चोटी पर खड़े हो गए और अपने पैरों से उस विशाल पर्वत को दबा दिया, जिससे वह दूसरे पर्वत के समान दिखाई देने लगा। 36.
 
The brave Hanuman stood on the peak of a mountain and by pressing down that great mountain with his feet, began to appear like another mountain. 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)