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श्लोक 6.74.34  |
ता: सर्वा हनुमन् गृह्य क्षिप्रमागन्तुमर्हसि।
आश्वासय हरीन् प्राणैर्योज्य गन्धवहात्मज॥ ३४॥ |
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| अनुवाद |
| हनुमान! पवनपुत्र! वे सब औषधियाँ लेकर शीघ्र लौट आओ और वानरों को जीवनदान देकर उन्हें आश्वस्त करो।' |
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| Hanuman! Son of the wind! Come back soon with all those medicines and assure the monkeys by giving them life.' |
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