श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.74.34 
ता: सर्वा हनुमन् गृह्य क्षिप्रमागन्तुमर्हसि।
आश्वासय हरीन् प्राणैर्योज्य गन्धवहात्मज॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हनुमान! पवनपुत्र! वे सब औषधियाँ लेकर शीघ्र लौट आओ और वानरों को जीवनदान देकर उन्हें आश्वस्त करो।'
 
Hanuman! Son of the wind! Come back soon with all those medicines and assure the monkeys by giving them life.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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