श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.74.31 
तयो: शिखरयोर्मध्ये प्रदीप्तमतुलप्रभम्।
सर्वौषधियुतं वीर द्रक्ष्यस्योषधिपर्वतम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
वीर! उन दो चोटियों के बीच तुम्हें औषधियों का एक पर्वत दिखाई देगा, जो अत्यंत प्रकाशमान है। उसकी ऐसी चमक है जो अतुलनीय है। वह पर्वत सब प्रकार की औषधियों से परिपूर्ण है॥31॥
 
‘Veer! Between those two peaks, you will see a mountain of medicinal herbs, which is extremely luminous. It has such a brilliance that is incomparable. That mountain is full of all kinds of medicinal herbs.॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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