श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.74.30 
तत: काञ्चनमत्युच्चमृषभं पर्वतोत्तमम्।
कैलासशिखरं चात्र द्रक्ष्यस्यरिनिषूदन॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुवीर! वहाँ पहुँचकर तुम्हें अत्यन्त ऊँचा, सुवर्णमय ऋषभ पर्वत और कैलाश शिखर दिखाई देंगे।
 
O enemy warrior! On reaching there you will see the very tall, golden mountain Rishabha and the peak of Kailash.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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