श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.74.23 
धरते मारुतिस्तात मारुतप्रतिमो यदि।
वैश्वानरसमो वीर्ये जीविताशा ततो भवेत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री! यदि पवन के समान वेगवान और अग्नि के समान पराक्रमी पवनपुत्र हनुमान् जी जीवित हैं, तो हम सब के भी जीवित रहने की आशा हो सकती है।॥23॥
 
Father! If Hanuman, the son of the wind, who is as swift as the wind and as powerful as the fire, is alive, then there can be hope that we all will be alive.'॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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