श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.74.22 
अस्मिञ्जीवति वीरे तु हतमप्यहतं बलम्।
हनूमत्युज्झितप्राणे जीवन्तोऽपि मृता वयम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
"यदि वीर हनुमान जीवित हैं, तो यह मृत सेना भी जीवित ही समझनी चाहिए - और यदि वे मर गए हैं, तो हम लोग जीवित होकर भी मृत समान ही हैं ॥ 22॥
 
"If the valiant Hanuman is alive, then this dead army should also be considered as alive - and if he has died, then even though we are alive, we are like dead people. ॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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