श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.74.21 
विभीषणवच: श्रुत्वा जाम्बवान् वाक्यमब्रवीत्।
शृणु नैर्ऋतशार्दूल यस्मात् पृच्छामि मारुतिम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
विभीषण की यह बात सुनकर जाम्बवान ने कहा, "राक्षसराज! सुनिए। मैं आपको बताता हूँ कि मैं पवनपुत्र हनुमान से क्यों पूछ रहा हूँ।"
 
On hearing this from Vibhishan, Jambvan said, 'King of demons! Listen. I am telling you why I am asking Hanuman, the son of the wind.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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