Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.74.18: हे उत्तम व्रत के रक्षक विभीषण! मुझे बताओ, क्या वानरश्रेष्ठ हनुमान्‌ कहीं जीवित हैं, जिन्हें जन्म देने से अंजनादेवी श्रेष्ठ पुत्र की माता और वायुदेव श्रेष्ठ पुत्र के पिता माने जाते हैं?॥18॥   |   ramayan सर्ग 6.74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 74: जाम्बवान् के आदेश से हनुमान्जी का हिमालय से दिव्य ओषधियों के पर्वत को लाना और उन ओषधियों की गन्ध से श्रीराम, लक्ष्मण एवं समस्त वानरों का पुनः स्वस्थ होना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.74.18 
अञ्जना सुप्रजा येन मातरिश्वा च सुव्रत।
हनूमान् वानरश्रेष्ठ: प्राणान् धारयते क्वचित्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे उत्तम व्रत के रक्षक विभीषण! मुझे बताओ, क्या वानरश्रेष्ठ हनुमान्‌ कहीं जीवित हैं, जिन्हें जन्म देने से अंजनादेवी श्रेष्ठ पुत्र की माता और वायुदेव श्रेष्ठ पुत्र के पिता माने जाते हैं?॥18॥
 
‘Vibhishana, guardian of the best fast! Tell me, is that Hanuman, the best of monkeys, alive somewhere, by giving birth to whom Anjanadevi is considered to be the mother of the best son and Vayudev is considered to be the father of the best son?' 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)