श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 73: इन्द्रजित के ब्रह्मास्त्र से वानरसेना सहित श्रीराम और लक्ष्मण का मूर्च्छित होना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.73.9 
समास्थाय महातेजा रथं हरिरथोपमम्।
जगाम सहसा तत्र यत्र युद्धमरिंदम:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उसका रथ इन्द्र के रथ के समान जान पड़ता था। उस पर सवार होकर शत्रुओं का नाश करने वाला वह महाबली दैत्य सहसा उस स्थान पर पहुँच गया जहाँ युद्ध हो रहा था॥9॥
 
His chariot looked like the chariot of Indra. Riding on it, that mighty demon who was the destroyer of enemies suddenly reached the place where the battle was taking place.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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