श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 73: इन्द्रजित के ब्रह्मास्त्र से वानरसेना सहित श्रीराम और लक्ष्मण का मूर्च्छित होना  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  6.73.71 
प्रच्छादयत्येष हि राक्षसेन्द्र:
सर्वा दिश: सायकवृष्टिजालै:।
एतच्च सर्वं पतिताग्रॺशूरं
न भ्राजते वानरराजसैन्यम्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
इस समय राक्षसराज इन्द्रजित् बाणों की वर्षा से सम्पूर्ण दिशाओं को आच्छादित कर रहे हैं। वानरराज सुग्रीव की सम्पूर्ण सेना, जिसके प्रमुख योद्धा पराजित हो चुके हैं, अब शोभा नहीं दे रही है ॥ 71॥
 
At this time, the demon king Indrajit is covering all directions with a shower of arrows. The entire army of the monkey king Sugreeva, whose chief warriors have been defeated, is no longer looking good. ॥ 71॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd