| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 73: इन्द्रजित के ब्रह्मास्त्र से वानरसेना सहित श्रीराम और लक्ष्मण का मूर्च्छित होना » श्लोक 62-65 |
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| | | | श्लोक 6.73.62-65  | हनूमन्तं च सुग्रीवमङ्गदं गन्धमादनम्।
जाम्बवन्तं सुषेणं च वेगदर्शिनमेव च॥ ६२॥
मैन्दं च द्विविदं नीलं गवाक्षं गवयं तथा।
केसरिं हरिलोमानं विद्युद्दंष्ट्रं च वानरम्॥ ६३॥
सूर्याननं ज्योतिर्मुखं तथा दधिमुखं हरिम्।
पावकाक्षं नलं चैव कुमुदं चैव वानरम्॥ ६४॥
प्रासै: शूलै: शितैर्बाणैरिन्द्रजिन्मन्त्रसंहितै:।
विव्याध हरिशार्दूलान् सर्वांस्तान् राक्षसोत्तम:॥ ६५॥ | | | | | | अनुवाद | | दैत्यराज इन्द्रजीत ने दिव्य मन्त्रों का उच्चारण करके, प्रास, शूल तथा तीखे बाणों की सहायता से हनुमान, सुग्रीव, अंगद, गन्धमादन, जाम्बवान, सुषेण, वेगदर्शी, मुख्य, द्विविद, नील, गवाक्ष, गवय, केसरी, हरिलोम, विद्युद्दन्ष्ट्र, सूर्यानन, ज्योतिर्मुख, दधिमुख, पावकाक्ष, नल तथा कुमुद आदि वानरों को घायल कर दिया। | | | | Indrajit, the demon lord, by invoking the divine mantras, with the help of prasas, prongs and sharp arrows, killed Hanuman, Sugriva, Angad, Gandhamadan, Jambavan, Sushen, Vegdarshi, Main, Dwivid, Neel, Gavaksh, Gavay, Kesari, Hariloma, Vidyuddanshtra, Suryanan, Jyotirmukh, Dadhimukh, Pavakaksha, Nal and Kumud etc. Injured the monkeys. | | ✨ ai-generated | | |
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