श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 73: इन्द्रजित के ब्रह्मास्त्र से वानरसेना सहित श्रीराम और लक्ष्मण का मूर्च्छित होना  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  6.73.58 
स शूलनिस्त्रिंशपरश्वधानि
व्याविद्धदीप्तानलसप्रभाणि।
सविस्फुलिङ्गोज्ज्वलपावकानि
ववर्ष तीव्रं प्लवगेन्द्रसैन्ये॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
वह वानरराज की सेना पर शूलों, तलवारों और कुल्हाड़ियों की भयंकर वर्षा करने लगा, जो प्रज्वलित पावकों के समान चमकीली थीं और जिनसे चिनगारियाँ निकलती थीं। 58॥
 
He started raining down upon the army of the monkey king a fierce shower of prongs, swords and axes that were as bright as the flaming pavkas and emanating bright fire with sparks. 58॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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