श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 73: इन्द्रजित के ब्रह्मास्त्र से वानरसेना सहित श्रीराम और लक्ष्मण का मूर्च्छित होना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  6.73.55 
ते शक्रजिद‍्बाणविशीर्णदेहा
मायाहता विस्वरमुन्नदन्त:।
रणे निपेतुर्हरयोऽद्रिकल्पा
यथेन्द्रवज्राभिहता नगेन्द्रा:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
जैसे इन्द्र के वज्र से चोट खाकर बड़े-बड़े पर्वत टूटकर गिर जाते हैं, उसी प्रकार वे पर्वताकार वानर युद्धभूमि में इन्द्रजित के बाणों से छलपूर्वक मारे गए और शरीर के क्षत-विक्षत हो जाने के कारण विकृत स्वर में चीखते-चिल्लाते हुए पृथ्वी पर गिर पड़े॥ 55॥
 
Just as huge mountains crumble after being struck by Indra's thunderbolt, similarly those mountain-sized monkeys, having been treacherously killed by Indrajit's arrows on the battlefield, fell on the earth shrieking and screaming in distorted voices due to the mutilation of their bodies.॥ 55॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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