श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 73: इन्द्रजित के ब्रह्मास्त्र से वानरसेना सहित श्रीराम और लक्ष्मण का मूर्च्छित होना  »  श्लोक 52-53
 
 
श्लोक  6.73.52-53 
पुनरेव महातेजा राक्षसेन्द्रात्मजो बली॥ ५२॥
संसृज्य बाणवर्षं च शस्त्रवर्षं च दारुणम्।
ममर्द वानरानीकं परितस्त्विन्द्रजिद् बली॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
वह राक्षसराज इन्द्रजित बड़ा तेजस्वी, प्रभावशाली और बलवान था। उसने पुनः सब ओर से बाण आदि अस्त्र-शस्त्रों की वर्षा करके वानर सेना को कुचल डाला। 52-53॥
 
That demon prince Indrajit was very brilliant, influential and strong. He again crushed the monkey army by raining down arrows and other weapons from all sides. 52-53॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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