vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 73: इन्द्रजित के ब्रह्मास्त्र से वानरसेना सहित श्रीराम और लक्ष्मण का मूर्च्छित होना
»
श्लोक 33
श्लोक
6.73.33
ततस्ते राक्षसा: सर्वे गर्जन्तो जयकांक्षिण:।
अभ्यवर्षंस्ततो घोरं वानरान् शरवृष्टिभि:॥ ३३॥
अनुवाद
उनसे प्रेरित होकर विजय चाहने वाले समस्त राक्षस बड़े जोर से गर्जना करने लगे और वानरों पर बाणों की भयंकर वर्षा करने लगे।
Having been inspired by him, all those demons, who desired victory, roared loudly and began to shower a fierce shower of arrows upon the monkeys.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×