श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 73: इन्द्रजित के ब्रह्मास्त्र से वानरसेना सहित श्रीराम और लक्ष्मण का मूर्च्छित होना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  6.73.32 
रावणिस्तु सुसंक्रुद्धस्तान् निरीक्ष्य निशाचरान्।
हृष्टा भवन्तो युध्यन्तु वानराणां जिघांसया॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
रावण का पुत्र इन्द्रजित अपने शत्रुओं के प्रति अत्यन्त क्रोध से भर गया और निशाचर वानरों की ओर देखकर बोला - "तुम सब लोग वानरों को मारने की इच्छा से हर्ष और उत्साह के साथ युद्ध करो।" 32॥
 
Ravana's son Indrajit was filled with extreme anger towards his enemies. He looked towards the nocturnal monkeys and said, “You all fight with joy and enthusiasm with the desire to kill the monkeys.” 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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