श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 73: इन्द्रजित के ब्रह्मास्त्र से वानरसेना सहित श्रीराम और लक्ष्मण का मूर्च्छित होना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.73.3 
ततस्तु राजानमुदीक्ष्य दीनं
शोकार्णवे सम्परिपुप्लुवानम्।
रथर्षभो राक्षसराजसूनु-
स्तमिन्द्रजिद् वाक्यमिदं बभाषे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
राजा रावण को शोक के समुद्र में डूबा हुआ और दीन हुआ देखकर रथियों में श्रेष्ठ राक्षसराज इन्द्रजित ने यह कहा- ॥3॥
 
Seeing King Ravana drowned and humbled in the sea of ​​sorrow, the demon prince Indrajit, the best among the charioteers, said this - 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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