श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 73: इन्द्रजित के ब्रह्मास्त्र से वानरसेना सहित श्रीराम और लक्ष्मण का मूर्च्छित होना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.73.29 
स पावकं पावकदीप्ततेजा
हुत्वा महेन्द्रप्रतिमप्रभाव:।
सचापबाणासिरथाश्वसूत:
खेऽन्तर्दधेऽऽत्मानमचिन्त्यवीर्य:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जिनकी कांति अग्नि के समान चमक रही थी और जो इन्द्र के समान अतुलनीय प्रभाव से संपन्न थे; वे अचिन्त्य पराक्रमी इन्द्रजित अग्नि में आहुति देकर धनुष, बाण, रथ, तलवार, घोड़े और सारथि सहित आकाश में अदृश्य हो गए॥29॥
 
Whose radiance was glowing like fire and who was endowed with incomparable influence like Lord Indra; That inconceivably mighty Indrajit, after offering sacrifice in the fire, made himself invisible in the sky along with his bow, arrows, chariot, sword, horses and charioteer. 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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