श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 73: इन्द्रजित के ब्रह्मास्त्र से वानरसेना सहित श्रीराम और लक्ष्मण का मूर्च्छित होना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.73.14 
स शङ्खनिनदै: पूर्णैर्भेरीणां चापि नि:स्वनै:।
जगाम त्रिदशेन्द्रारिराजिं वेगेन वीर्यवान्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
शंखों की ध्वनि के साथ तुरहियों की भयंकर ध्वनि सर्वत्र गूँज रही थी। उस गर्जनापूर्ण ध्वनि के साथ इन्द्र का शत्रु वीर इन्द्रजित बड़े वेग से युद्धभूमि की ओर बढ़ा॥14॥
 
The terrifying sound of trumpets mixed with the sound of conches echoed everywhere. With that tumultuous sound, the valiant Indrajit, the enemy of Indra, proceeded towards the battlefield with great speed.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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