श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 73: इन्द्रजित के ब्रह्मास्त्र से वानरसेना सहित श्रीराम और लक्ष्मण का मूर्च्छित होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.73.1 
ततो हतान् राक्षसपुङ्गवांस्तान्
देवान्तकादित्रिशिरोऽतिकायान्।
रक्षोगणास्तत्र हतावशिष्टा-
स्ते रावणाय त्वरिता: शशंसु:॥ १॥
 
 
अनुवाद
रणभूमि में मरते-मरते बचे निशाचर ने तुरन्त रावण के पास जाकर उसे देवान्तक, त्रिशिरा और अतिकाय आदि राक्षसों के मारे जाने का समाचार सुनाया॥1॥
 
Nishachar, who had escaped death in the battlefield, immediately went to Ravana and told him the news of the death of demons like Devantaka, Trishira and Atikaya. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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