श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 72: रावण की चिन्ता तथा उसका राक्षसों को पुरी की रक्षा के लिये सावधान रहने का आदेश  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  6.72.13-14 
निष्क्रमो वा प्रवेशो वा ज्ञातव्य: सर्वदैव न:॥ १३॥
यत्र यत्र भवेद् गुल्मस्तत्र तत्र पुन: पुन:।
सर्वतश्चापि तिष्ठध्वं स्वै: स्वै: परिवृता बलै:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
‘हमें सदैव यह जानना चाहिए कि अशोक वाटिका में कौन कब आता है और कब जाता है। जहाँ-जहाँ सैन्य शिविर हों, उन पर कड़ी नजर रखनी चाहिए और अपने सैनिकों के साथ हर जगह चौकस रहना चाहिए।॥13-14॥
 
‘We should always know who enters and when leaves the Ashok Vatika. Wherever there are military camps, keep a close watch on them and be on guard with your own soldiers everywhere.॥ 13-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)