श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 71: अतिकाय का भयंकर युद्ध और लक्ष्मण के द्वारा उसका वध  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  6.71.86 
तदस्त्रं ज्वलितं घोरं लक्ष्मण: शरमाहितम्।
अतिकायाय चिक्षेप कालदण्डमिवान्तक:॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
उसी समय लक्ष्मण ने दिव्यास्त्र से युक्त वह उग्र और भयंकर बाण अतिकाया पर चलाया, मानो यमराज ने अपना कालदण्ड चलाया हो ॥86॥
 
At that very moment, Lakshman fired that fiery and fierce arrow, endowed with the power of the divine weapon, at Atikakaya, as if Yamraj had used his Kaaldanda. 86॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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