श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 71: अतिकाय का भयंकर युद्ध और लक्ष्मण के द्वारा उसका वध  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  6.71.65 
ततो विद्याधरा भूता देवा दैत्या महर्षय:।
गुह्यकाश्च महात्मानस्तद् युद्धं द्रष्टुमागमन्॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात विद्याधर, भूत, देवता, दानव, बड़े-बड़े ऋषि-मुनि उस युद्ध को देखने आये।
 
Thereafter Vidyadhar, ghosts, gods, demons, great sages and great sages came to see that war.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd