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श्लोक 6.71.64  |
बालेन विष्णुना लोकास्त्रय: क्रान्तास्त्रिविक्रमै:।
लक्ष्मणस्य वच: श्रुत्वा हेतुमत् परमार्थवत्।
अतिकाय: प्रचुक्रोध बाणं चोत्तममाददे॥ ६४॥ |
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| अनुवाद |
| वामन रूप में भगवान विष्णु बालक के समान दिखते थे, किन्तु उन्होंने तीन पग में ही सम्पूर्ण त्रिलोकी नाप ली।’ लक्ष्मण की यह सर्वथा सत्य एवं तर्कपूर्ण बात सुनकर अतिकाय के क्रोध की सीमा न रही। उन्होंने एक उत्तम बाण हाथ में ले लिया। |
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| Lord Vishnu in the form of Vamana looked like a child but he measured the entire Triloki with just three steps.' On hearing this absolutely true and logical statement of Lakshman, Atikaya's anger knew no bounds. He took a fine arrow in his hand. |
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