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श्लोक 6.71.62  |
अद्य ते मामका बाणास्तप्तकाञ्चनभूषणा:।
पास्यन्ति रुधिरं गात्राद् बाणशल्यान्तरोत्थितम्॥ ६२॥ |
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| अनुवाद |
| ‘आज मेरे तपे हुए सोने से विभूषित बाण अपनी नोकों से बने छिद्रों से तुम्हारे शरीर से निकलने वाले रक्त को पी जायेंगे ॥ 62॥ |
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| ‘Today my arrows decorated with heated gold will drink the blood coming out of your body from the holes made by their tips.॥ 62॥ |
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