श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 71: अतिकाय का भयंकर युद्ध और लक्ष्मण के द्वारा उसका वध  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  6.71.62 
अद्य ते मामका बाणास्तप्तकाञ्चनभूषणा:।
पास्यन्ति रुधिरं गात्राद् बाणशल्यान्तरोत्थितम्॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
‘आज मेरे तपे हुए सोने से विभूषित बाण अपनी नोकों से बने छिद्रों से तुम्हारे शरीर से निकलने वाले रक्त को पी जायेंगे ॥ 62॥
 
‘Today my arrows decorated with heated gold will drink the blood coming out of your body from the holes made by their tips.॥ 62॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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