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श्लोक 6.71.61  |
तत: शिरस्ते निशितै: पातयिष्याम्यहं शरै:।
मारुत: कालसम्पक्वं वृन्तात् तालफलं यथा॥ ६१॥ |
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| अनुवाद |
| उसके बाद मैं अपने तीखे बाणों से तुम्हारा सिर काट डालूँगा, जैसे वायु ताड़ के वृक्ष के पके फलों को समय के साथ उसके तने (बौंदी) से गिरा देती है॥ 61॥ |
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| After that I shall chop off your head with my sharp arrows, just as the wind causes the ripe fruits of the palm tree to fall from its trunk (baundi) over time.॥ 61॥ |
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