श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 71: अतिकाय का भयंकर युद्ध और लक्ष्मण के द्वारा उसका वध  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  6.71.57 
श्रुत्वातिकायस्य वच: सरोषं
सगर्वितं संयति राजपुत्र:।
स संचुकोपातिबलो मनस्वी
उवाच वाक्यं च ततो महार्थम्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
युद्धस्थल में क्रोध और अभिमान से भरे हुए अतिकाय के ये वचन सुनकर परम बलवान और बुद्धिमान राजकुमार लक्ष्मण अत्यन्त क्रोधित हो उठे और उन्होंने बड़े अर्थ से युक्त ये वचन कहे-॥57॥
 
On hearing these words of Atikaya filled with anger and pride on the battlefield, the extremely powerful and intelligent prince Lakshmana became very angry. He spoke these words full of great meaning -॥ 57॥
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