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श्लोक 6.71.49  |
सौमित्रेश्चापनिर्घोषं श्रुत्वा प्रतिभयं तदा।
विसिस्मिये महातेजा राक्षसेन्द्रात्मजो बली॥ ४९॥ |
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| अनुवाद |
| उस समय महाबली और पराक्रमी राक्षसराज अतिकाय सुमित्रापुत्र के धनुष की भयंकर टंकार सुनकर आश्चर्यचकित हो गये। |
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| At that time the mighty and powerful demon prince Atikaya was astonished to hear the terrifying sound of the bow of Sumitra's son. |
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