श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 71: अतिकाय का भयंकर युद्ध और लक्ष्मण के द्वारा उसका वध  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.71.31 
एतेनाराधितो ब्रह्मा तपसा भावितात्मना।
अस्त्राणि चाप्यवाप्तानि रिपवश्च पराजिता:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
इस अतिकाय ने तप के कारण शुद्ध हृदय से दीर्घकाल तक ब्रह्माजी की आराधना की थी। ब्रह्माजी से अनेक दिव्यास्त्र प्राप्त करके उनसे अनेक शत्रुओं को परास्त किया था॥31॥
 
‘This Atikaya, having a pure heart due to penance, had worshipped Lord Brahma for a long time. He had obtained many divine weapons from Lord Brahma and had defeated many enemies with them.॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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