श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 71: अतिकाय का भयंकर युद्ध और लक्ष्मण के द्वारा उसका वध  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.71.30 
यस्य बाहुं समाश्रित्य लङ्का भवति निर्भया।
तनयं धान्यमालिन्या अतिकायमिमं विदु:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
लंकापुरी अपने बाहुबल का आश्रय लेकर सदैव निर्भय रही है। यह वीर निशाचर है। यह रावण की दूसरी पत्नी धन्यमालिनी का पुत्र है। लोग इसे अतिकाय नाम से जानते हैं।
 
‘Lankapuri has always remained fearless by taking shelter of his physical strength. He is this brave night-bearer. He is the son of Ravana's second wife Dhanyamalini. People know him by the name of Atikaya.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd