श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 71: अतिकाय का भयंकर युद्ध और लक्ष्मण के द्वारा उसका वध  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.71.29 
अश्वपृष्ठे नागपृष्ठे खड्गे धनुषि कर्षणे।
भेदे सान्त्वे च दाने च नये मन्त्रे च सम्मत:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
हाथी-घोड़ों पर चढ़ने, तलवार चलाने, धनुष पर बाण चढ़ाने, प्रत्यंचा खींचने, लक्ष्य पर प्रहार करने, शांति और दान की शक्ति का प्रयोग करने, तथा न्यायपूर्ण व्यवहार और उपदेश देने की क्षमता के कारण वह सब लोगों के द्वारा आदर योग्य है॥ 29॥
 
‘He is respected by all for his ability to ride elephants and horses, wield a sword, aim arrows at a bow, draw the string, hit the target, use the power of peace and charity, and for his just behavior and advice.॥ 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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