श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 71: अतिकाय का भयंकर युद्ध और लक्ष्मण के द्वारा उसका वध  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.71.23 
काञ्चनाङ्गदनद्धाभ्यां भुजाभ्यामेष शोभते।
शृङ्गाभ्यामिव तुङ्गाभ्यां हिमवान् पर्वतोत्तम:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
इसकी भुजाएँ स्वर्णमय बाजूबंदों से सुशोभित हैं। उन भुजाओं से युक्त यह विशाल रात्रिचर जीव दो ऊँचे शिखरों वाले पर्वतराज हिमालय के समान शोभा पाता है॥ 23॥
 
‘Its arms are adorned with golden armlets. With those arms this huge night creature looks like the Himalayas, the king of mountains with two high peaks.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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