श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 71: अतिकाय का भयंकर युद्ध और लक्ष्मण के द्वारा उसका वध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.71.14 
कालजिह्वाप्रकाशाभिर्य एषोऽभिविराजते।
आवृतो रथशक्तीभिर्विद्युद्भिरिव तोयद:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'केवल इतना ही नहीं, यह वीर रात्रि प्राणी मृत्यु की जीभ के समान चमकते हुए रथों से घिरा हुआ, बिजली की मालाओं से आच्छादित बादल के समान चमक रहा है॥14॥
 
‘Not only this, this brave night creature surrounded by chariots shining like the tongue of death, is shining like a cloud covered with garlands of lightning.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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